
भारत में आधार कार्ड आज एक ऐसी पहचान बन चुका है जिसके बिना सरकारी योजनाओं का लाभ, स्कूल एडमिशन, या कई प्रशासनिक कार्य पूरे नहीं हो पाते। अब इसी दिशा में UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) ने माता‑पिता को बड़ी राहत दी है। संस्था ने 2025 में एक नया नियम लागू किया है जिसके तहत अब छोटे बच्चों के आधार कार्ड बनवाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य नहीं रहेगा।
यह बदलाव विशेष रूप से उन परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगा जो ग्रामीण या पिछड़े क्षेत्रों में रहते हैं और जिनके पास अपने बच्चों के जन्म का आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
क्या है UIDAI का नया नियम?
UIDAI के ताज़ा दिशानिर्देशों में कहा गया है कि यदि किसी बच्चे के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, तो माता‑पिता अन्य स्वीकृत दस्तावेज़ों के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं। इन वैकल्पिक प्रमाणों से बच्चे की जन्म तिथि और पहचान की पुष्टि संभव होगी।
मान्य वैकल्पिक दस्तावेज़
- अस्पताल द्वारा जारी डिस्चार्ज स्लिप या जन्म प्रमाण पत्र: बच्चे की जन्म तिथि साबित करने के लिए
- स्कूल का बोनाफाइड सर्टिफिकेट या रिकॉर्ड: पहचान और जन्म तिथि दोनों के लिए
- परिवार के मुखिया का प्रमाण पत्र: परिवार के भीतर पहचान की पुष्टि के लिए
- राज्य सरकार द्वारा प्रमाणित रिकॉर्ड: जन्म संबंधी आधिकारिक डेटा के प्रमाण के रूप में
UIDAI का मानना है कि यह परिवर्तन आवेदकों की जटिलता कम करेगा और हर बच्चे को डिजिटल पहचान दिलाने का मार्ग आसान बनाएगा।
2023 के बाद लागू हुआ नया सिस्टम
भारत सरकार ने 1 अक्टूबर 2023 से जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून में संशोधन किया था। उस संशोधन के बाद हुए परिवर्तन के अनुसार:
- 1 अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए सिर्फ डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र को ही जन्म तिथि का मान्य दस्तावेज़ माना जाएगा।
- जबकि 1 अक्टूबर 2023 से पहले जन्मे बच्चों के लिए उपरोक्त वैकल्पिक प्रमाण भी स्वीकृत होंगे।
इसके अलावा सरकार ने देशभर में डिजिटल पोर्टल शुरू किए हैं जहां जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी किए जाते हैं।
QR कोड वाला ही जन्म प्रमाण पत्र क्यों जरूरी?
UIDAI और राज्य सरकारों ने स्पष्ट किया है कि अब केवल QR कोड युक्त प्रमाण पत्र ही स्वीकार किए जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि किसी भी दस्तावेज़ की सटीकता को तुरंत ऑनलाइन जांचा जा सके और धोखाधड़ी की संभावना खत्म हो।
पुराने कागज़ी प्रमाण पत्र भी फिलहाल मान्य हैं, लेकिन UIDAI ने माता‑पिता को सलाह दी है कि वे अपने दस्तावेज़ों को नए डिजिटल प्रारूप में अपडेट करवा लें ताकि आधार आवेदन में किसी अड़चन का सामना न करना पड़े।
राज्यों को दिए गए दिशा‑निर्देश
UIDAI ने सभी राज्य स्तरीय आधार सेवा केंद्रों को निर्देशित किया है कि 1 अक्टूबर 2023 से पहले जन्मे बच्चों के लिए पुराने दस्तावेज़ स्वीकार करें, लेकिन उसके बाद जन्मे बच्चों के लिए केवल QR‑कोड वाले डिजिटल प्रमाण पत्र मान्य होंगे।
साथ ही प्रत्येक केंद्र को ग्रामीण क्षेत्रों में इस बदलाव की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंचाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
नए नियम से क्या होंगे फायदे?
- दस्तावेज़ न होने पर भी बच्चों का आधार बन सकेगा
- ग्रामीण परिवारों के लिए आवेदन प्रक्रिया सरल होगी
- स्कूल एडमिशन और सरकारी योजनाओं में नामांकन पहले से आसान बनेगा
- डिजिटल सिस्टम से सत्यापन तेज़ और पारदर्शी होगा
महत्वपूर्ण जानकारी तालिका: पुराने बनाम नए नियम
| श्रेणी | पुराने नियम | नए नियम (2025) |
|---|---|---|
| आवश्यक दस्तावेज़ | जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य | वैकल्पिक दस्तावेज़ों को भी मान्यता |
| प्रमाण पत्र का स्वरूप | कागज़ी रूप में स्वीकृत | QR‑कोड युक्त डिजिटल स्वरूप |
| आवेदन प्रक्रिया | आंशिक रूप से ऑफलाइन | पूरी तरह ऑनलाइन |
| प्रभाव क्षेत्र | अक्टूबर 2023 से पहले और बाद के जन्म | नया संशोधित नियम प्रभावी |
UIDAI का उद्देश्य
UIDAI का मकसद हर भारतीय नागरिक, खासकर बच्चों, को एक विशिष्ट पहचान देना है। यह सिर्फ पहचान का साधन नहीं बल्कि सरकारी सेवाओं और योजनाओं तक पहुँच का माध्यम भी है। इसलिए यह बदलाव डिजिटल भारत और “सबका अधिकार पहचान” मिशन की दिशा में एक मजबूत कदम है।





